विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश

आनंद अग्निहोत्री/पारदर्शी विकास न्यूज़ निजी घरानों की मदद के लिए बढ़ाया गया है टैरिफ – टैरिफ में भारी वृद्धि के लिए तैयार रहें उपभोक्ता: विजयवाड़ा में उप्र के ऊर्जा मंत्री के सामने उठा निजीकरण का विरोध : उप्र में कैबिनेट मंत्री, सांसद सहित कई विधायकों को दिया गया ज्ञापन


विजयवाड़ा में आज हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग के दौरान उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के सामने विजयवाड़ा के बिजली इंजीनियरों ने उत्तर प्रदेश में चल रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में सवाल उठाया। आज प्रदेश में कैबिनेट मंत्री, सांसद, राज्य मंत्री और कई विधायकों को निजीकरण के विरोध में ज्ञापन दिए गए। उत्तर प्रदेश में 5 साल बाद बिजली का टैरिफ बढ़ाने पर संघर्ष समिति ने कहा है कि यह सब निजी घरानों की मदद के लिए किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने आम उपभोक्ताओं को सचेत किया है कि यदि निजीकरण वापस न हुआ तो आम उपभोक्ता बिजली के टैरिफ में भारी वृद्धि के लिए तैयार रहें। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज पूरे प्रदेश में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध सभाओं का क्रम जारी रहा। संघर्ष समिति ने बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छटनी का आदेश वापस लेने की मांग की है।


निजीकरण की दृष्टि से बनाए गए छह प्रांतों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की आज विजयवाड़ा में मीटिंग संपन्न हुई। मीटिंग की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद यशो नायक ने की। मीटिंग में आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उप्र के ऊर्जा मंत्री सम्मिलित थे। मीटिंग के दौरान आंध्र प्रदेश के बिजली इंजीनियरों ने उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा से उत्तर प्रदेश में चल रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में चर्चा की और निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग की । उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने इसका कोई उत्तर नहीं दिया।
आंध्र प्रदेश के बिजली इंजीनियरों ने जानकारी दी है कि विजयवाड़ा में ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग के दौरान जहां अन्य प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों ने विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का विरोध किया वही उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने यह कहा कि निजीकरण ही सुधार का एकमात्र रास्ता है ।


संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज लखनऊ में कहा कि उत्तर प्रदेश में 5 वर्ष के बाद बिजली का टैरिफ बढ़ाया जाना महज संयोग नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सब निजी घरानों की मदद के लिए किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने आम उपभोक्ताओं को सचेत किया है कि यदि बिजली का निजीकरण न रोका गया तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली के टैरिफ में कई गुणा वृद्धि होगी। निजीकरण के बाद मुंबई, कोलकाता की तरह उत्तर प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं को भी 17 से 18 रुपए प्रति यूनिट बिजली की दरें देने के लिए तैयार रहना होगा।
संघर्ष समिति ने आज पुनः कहा कि जब निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट का शपथ पत्र और अन्य डॉक्यूमेंट फर्जी पाए गए हैं तब इस कंपनी से प्रस्ताव लेकर किस आधार पर निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष और शीर्ष प्रबंधन फर्जी दस्तावेजों के सामने आने के बाद भी फाइल को दबाए हुए हैं और अवैध ढंग से नियुक्त किए गए कंसलटेंट की नियुक्ति रद्द नहीं कर रहे हैं। यह जानकारी मिली है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेंडर इसी कंसलटेंट से तैयार करा लिया गया है जो पूरी तरह अवैधानिक है ।
निजीकरण के विरोध में आज संघर्ष समिति की ओर से मुजफ्फरनगर में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार एवं राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल को ज्ञापन दिया गया । लालगंज में सांसद दरोगा प्रसाद सरोज को ज्ञापन दिया गया। फर्रुखाबाद में विधायक सुशील कुमार शाक्य, खलीलाबाद में विधायक अंकुर राज तिवारी और गणेश चौहान को ज्ञापन दिए। इसके अतिरिक्त कई विधायकों, ग्राम पंचायतों के अध्यक्ष और ग्राम प्रधानों को भी ज्ञापन दिया गया।
संघर्ष समिति ने 45% संविदा कर्मियों की छटनी के आदेश पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि यह सब निजीकरण की दृष्टि से किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने मांग की है कि संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छटनी का आदेश तत्काल निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज भी प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर निजीकरण के विरोध में प्रदर्शनों का दौर जारी रहा।

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