वक्ताओं महिलाओं के सम्मानपूर्वक जीवन आधार विकसित करने के लिए लगातार काम करने की जरुरत
अजय त्रिपाठी पारदर्शी विकास न्यूज़/बहराइच। घाघरा नदी नेचुरल प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड जोगापुरवा बौंडी बहराइच एवं पंचशील डेवलपमेंट ट्रस्ट, बहराइच के संयुक्त तत्वाधान में नदी विस्थापित परिवार की महिलाओं के साथ मिलकर एक समारोह का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं के सम्मानपूर्वक जीवन आधार विकसित करने हेतु आवश्यक उन सारी सुविधाओं/व्यवस्थाओं के बारे में विस्तृत चर्चा हुई जिससे परिवार स्तर पर एक सहज, सरल एवं अनुकरणीय व्यवस्था स्थापित की जा सके। सभी व्यवस्थाओं के लिए समाज व हर परिवार के अगुवाकार को खुद से समाज के विकास के लिए काम करने वाले हितभागियों के साथ मिलकर तेजी से कार्य करने की जरूरत है।
जोगापुरवा गाँव में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम में जोगापुरवा, शारदासिंहपुरवा, सिलौटा तटबंध के 100 सबसे अधिक महिला, पुरुष एवं बच्चे उपस्थित थे जिन्होंने पिछले 25 सालों में पुनर्वास के साथ-साथ महिलाओं और बालिकाओं के सुरक्षित एवं सम्मान पूर्वक जीवन यापन के लिए परिवार एवं गांव के स्तर पर किये गए प्रयासों में सहभागी रहे| आज गांव से प्राथमिक विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक बड़ी संख्या में बालिकाएं स्कूलों तक पहुंच रही हैं और परिवार के अभिभावक भी उन्हें पूरा सहयोग कर रहे हैं। ऐसी व्यवस्था अन्य गांव में कम है इससे यह साबित होता है कि आज परिवार स्तर पर और गांव स्तर पर लोगों के साथ अधिक समय देने समझने और जागरूक करने की जरूरत है जिससे महिलाओं व बालिकाओं को परिवार स्तर से लेकर समाज के हर स्तर पर सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो पायें। आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक विद्यालय, उच्च माध्यमिक विद्यालय आदि फोरम पर बालक बालिकाओं के बीच बिना भेदभाव किये आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं|
इस समारोह में उपस्थित महिलाओं ने अपने विचार भी साझा किया जिसमें बोलते हुए राजकुमारी ने बताया कि बालिकाओं को हुनर सीखने के लिए आगे आना चाहिए और जिले में कई ऐसी व्यवस्थाएं/ सुविधायें उपलब्ध हैं जहां ग्रामीण क्षेत्र के युवक-युवती नि:शुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने कौशल विकास का प्रयास संभव कर सकते हैं और अपने आर्थिक निर्भरता के लिए भविष्य में काम कर सकते हैं। इसी प्रकार बात करते हुए रेखा ने अपने बच्चों में बिना भेदभाव के पढ़ने के अवसर और पर्याप्त भोजन देने की बात कही और यह भी बताया कि हम बच्चों के पढ़ाई पर विशेष ध्यान देते हैं और यह भी निश्चित करते हैं कि इनमें संस्कृति सभ्यता व्यवहार एवं मानवता की सारी समझ बने।
इसी प्रकार चर्चा करते हुए माया ने कहा कि हम अपने परिवार के बेहतरी के लिए पोषण वाटिका से पर्याप्त आमदनी करते हैं और उसको अधिक कारगर बनाने हेतु प्रयास करते रहते हैं ठीक इसी प्रकार हम अपने बच्चों को भी अधिक होनहार बनाने के लिए उनके पढ़ाई और भोजन पर पूरा ध्यान देते हैं और अच्छे इंसान बनाने की कोशिश करते हैं। इस अवसर पर बात करते हुए जोगापुरवा निवासी केसरी देवी ने बताया कि उन्होंने अपने घर की आर्थिक स्थिति सुधारी है साथ ही बच्चों के जीवन को अधिक बेहतर बनाने का हमेशा प्रयास किया है और दूसरों के भी बच्चों को अच्छे अवसर देने के लिए प्रयासरत रहते हैं जिससे एक अच्छा और खुशहाल गांव बन सके।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बात करते हुए सिलौटा निवासी कुमारी किरन ने जो एलएलबी तृतीय वर्ष की छात्रा हैं महिलाओं को कानूनी अधिकार और सुरक्षात्मक कानून के बारे में जानकारी दी जिससे हर एक महिला अपने आप को सुरक्षित एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए व्यवस्थाएं प्राप्त कर सके। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि मेरे माता-पिता ने विपरीत परिस्थितियों में भी हमें पढ़ने का अवसर दिया है इस नाते हम उनके भी सम्मान का पूरा ख्याल रखते हैं और अपनी पढ़ाई और पढ़ाई पर विशेष ध्यान देते हुए आज इतने आगे बढ़ पाए हैं।
रामतेज यादव ने महिलाओं और बालिकाओं के जागरूकता और शिक्षा के बारे में किया जा रहे कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी और बताया कि इन प्रयासों से क्षेत्र में काफी कुछ समझ लोगों की बनी है और आगे भी इसी प्रकार से प्रयास होते रहेंगे। इसी क्रम में बोलते हुए रिंकी वर्मा ने बताया कि आज बालिकाओं की शिक्षा काफी बेहतर स्थिति में देखने को मिल रही है क्योंकि क्षेत्र में अब हर घर से बालिका पढ़ने के लिए स्कूल जाती है और लोग उनके ऊपर अधिक ध्यान दे रहे हैं साथ में पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार, संस्कृति, सभ्यता और बेहतर मानवीय व्यवहार के लिए भी बात करते हैं| बैठकों में अब महिलाओं के साथ बालिकाएं भी प्रतिभाग करती हैं और अपनी जानकारी बढाकर आगे बढ़ने में रुचि रखती हैं जिसका उदाहरण स्पष्ट रूप से बैठकों में उनकी सहभागिता से मिलता है।
अंत में सभी की सक्रिय भागीदारी को देखते हुए पंचशील डेवलपमेंट ट्रस्ट के निदेशक ध्रुव कुमार ने बताया कि आज एक बड़े गौरव और सम्मान की बात है कि एक छोटे से गांव में लोग जागरुक होकर परिवार स्तर से लेकर अपने रिश्तेदारी और गांव के स्तर पर भी यहां के संस्कृति, सभ्यता, पढ़ाई-लिखाई, जागरूकता, समझ और आर्थिक व्यवस्थापन के ऊपर अच्छी समझ रखते हैं और एकदम बिखरे हुए गांव को सजाने में महिलाओं, पुरुषों बच्चों और बालिकाओं का जो योगदान रहा है वह स्पष्ट रूप से झलकता है| आप सभी द्वारा हो रहे प्रयासों पर अधिक काम करने की जरूरत है जिससे हम आगे अच्छे भविष्य की कल्पना पूरे क्षेत्र, गांव और हर एक महिला के लिए कर सकें।
